नक्सलवाद हो रहा मोहभंग

बचपन को संवारो तो वतन संवरेगा, यदि बचपन बिगड़ा तो वतन की सूरत बिगड़ जायेगी. देश के बच्चे जो गांवों में रहते हैं, उन्हें शिक्षा की सबसे बड़ी आवश्यकता है. इस बारे में शिक्षा से जुड़े तमामा संसाधन उपलब्ध कराने के लिए सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि देश के इन नन्हे कर्णधारों […]

बचपन को संवारो तो वतन संवरेगा, यदि बचपन बिगड़ा तो वतन की सूरत बिगड़ जायेगी. देश के बच्चे जो गांवों में रहते हैं, उन्हें शिक्षा की सबसे बड़ी आवश्यकता है. इस बारे में शिक्षा से जुड़े तमामा संसाधन उपलब्ध कराने के लिए सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि देश के इन नन्हे कर्णधारों के हाथों से कलम और किताबें कहीं छूट न जायें. सरकार को मजबूत नीतियों पर चलते हुए विकास के ऐसे प्रयास करने होंगे,
जिससे मौजूदा तसवीर बदले. ताकि मजबूर होकर गरीब किसान अपने बच्चों को नक्सलवादियों के हवाले ना करें. इतना तो सरकार को सोचना ही है. नक्सलवादियों के सामने गरीब ग्रामीण माता-पिता असहाय रहते हैं. वे युवक-युवतियों को अपने गिरोह में शामिल होने के लिए मजबूर करते हैं. लेकिन इनसे लोगों का मोहभंग हो रहा है और ऐसे संगठन उद्देश्यहीन हो रहे हैं.
कन्हैया प्रसाद गुंजन, ई-मेल से

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