क्या देश में काबिलियत का मोल नहीं?

संपादक महोदय, आज देश में हर वर्ग के लोग अपने आप को अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर मानकर आरक्षण की मांग कर रहे हैं. जिन्हें पहले से आरक्षण मिल रहा है, वो तो है ही, लेकिन ये नये नवेले आरक्षण की मांग करनेवालों का तर्क समझ से परे है. महोदय, सही मायने में देखा […]

संपादक महोदय, आज देश में हर वर्ग के लोग अपने आप को अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर मानकर आरक्षण की मांग कर रहे हैं. जिन्हें पहले से आरक्षण मिल रहा है, वो तो है ही, लेकिन ये नये नवेले आरक्षण की मांग करनेवालों का तर्क समझ से परे है.
महोदय, सही मायने में देखा जाये, तो हमारे देश में अनेक समुदाय के लोग अल्पसंख्यक हैं. अब यदि सबको आरक्षण का लाभ दे दिया जाये, तो देश में काबिलियत का कोई मोल ही नहीं रह जायेगा.
फिर तो सभी आरक्षण नामक पिछले दरवाजे से सरकारी नौकरियों में प्रवेश पाने की कोशिश करेंगे. ऐसी स्थिति में फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की जरूरत ही नहीं रह जाती है. अगर सरकार को सही मायने में आरक्षण देना ही है, तो आर्थिक आधार पर लोगों को आरक्षण क्यों नहीं देती? इससे सबका भला होगा.
विजय प्रसाद, रांची

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