माता-पिता बचाओ अभियान की दरकार

संपादक महोदय, आपके समाचार पत्र में आठ मई को प्रकाशित वृद्ध हुए माता-पिता के प्रति संतान की संवदेनहीनता के बारे में अजय पांडेय का लेख पठनीय है एवं आजकल के पुत्रों की मनोदश को बताता है. ऐसा क्यों होता है? इसके मनोवैज्ञानिक, सामाजिक एवं आर्थिक पहलुओं के बारे में भी पता लगाया जाना चाहिए एवं […]

संपादक महोदय, आपके समाचार पत्र में आठ मई को प्रकाशित वृद्ध हुए माता-पिता के प्रति संतान की संवदेनहीनता के बारे में अजय पांडेय का लेख पठनीय है एवं आजकल के पुत्रों की मनोदश को बताता है. ऐसा क्यों होता है?
इसके मनोवैज्ञानिक, सामाजिक एवं आर्थिक पहलुओं के बारे में भी पता लगाया जाना चाहिए एवं इस पर व्यापक चर्चा भी होनी चाहिए. प्रभात खबर की प्रशंसा की जानी चाहि कि प्रत्येक शनिवार को वृद्धों के बारे में एक पृष्ठ समर्पित किया जाता है. भारत सरकार ने भी बेट बचाओ, बेटी पढ़ाओ का अभियान चलाया जा रहा है, उसी मर्ज पर माता-पिता को संभालो अभियान भी चलाने की जरूरत है.
अक्सर देखा जाता है कि वृद्ध माता-पिता के प्रति बेरुखी लड़के को स्वयं पिता बनने के बाद पैदा होती है. आज बुजुर्गो को संभालने की जरूरत है.
ललन प्रसाद वर्मा, घाटशिला

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