किसके लिए यह मजदूर दिवस?

आज पूरा विश्व मजदूर दिवस मना रहा है. पर इस दिवस की उन लाखों-करोड़ों मजदूरों के लिए कोई अहमियत नहीं है जो रोज कमाते-खाते हैं.मजदूरों की बड़ी आबादी इस दिन काम की तलाश में भटक रही होगी. यह दिवस तो राजनेताओं और बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों के लिए है. वे ही विभिन्न तरीकों से इस […]

आज पूरा विश्व मजदूर दिवस मना रहा है. पर इस दिवस की उन लाखों-करोड़ों मजदूरों के लिए कोई अहमियत नहीं है जो रोज कमाते-खाते हैं.मजदूरों की बड़ी आबादी इस दिन काम की तलाश में भटक रही होगी. यह दिवस तो राजनेताओं और बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों के लिए है. वे ही विभिन्न तरीकों से इस दिवस को सार्थक बनायेंगे; वे कामगार नहीं जो आज भी चिलचिलाती धूप में मिट्टी और सीमेंट में सन कर भूखे-प्यासे किसी निर्माण कार्य में लगे होंगे.
मजदूरों की वही स्थिति है जो आजादी के पूर्व थी. फिर इतने लंबे समयांतराल में क्या बदला? प्रधानमंत्री, नीतियां और कानून! सच तो यह है कि हमारे मजदूरों के साथ देश में गंदी राजनीति हो रही है. फिर किस आधार पर हमारे राजनेता देश को औद्योगिक राष्ट्र बनाने का सपना देखते हैं, जबकि करोड़ों मजदूर कष्ट में हैं?
सुधीर कुमार, गोड्डा

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