मीडिया में निजी स्कूलों के आर्थिक शोषण की चर्चा जोरों पर है. अभिभावकों में बौखलाहट है, तो राजनेता और सरकार खुद ही इसे मुद्दा बना कर जनता की नजर में लोकप्रिय होना चाह रहे हैं. वहीं, यदि हम परिस्थितियों पर नजर दौड़ायें, तो साफ हो जाता है कि इन निजी स्कूलों के पोषक कौन है?
आज सरकारी स्कूलों में हर प्रकार की सुविधा के बावजूद आखिर कौन सी ऐसी बात है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में बाधक साबित हो रही है? बड़ी इमारतें, मुफ्त में पुस्तक, वर्दी, भोजन, योग्य शिक्षक सब कुछ तो मुहैया है. सालाना अरबों रुपये सरकारी शिक्षा पर खर्च किये जा रहे हैं, मगर गुणवत्ता में सुधार नहीं है.
शिक्षकों से जनगणना करवायी जाती है, जो उन्हें शिक्षण कार्य से विमुख करती है. मेरा मानना है कि यदि सरकार आज भी ध्यान देना शुरू कर दे, तो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है.
बालचंद साव, रांची
