प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए फ्रांस, जर्मनी और कनाडा में आवाज बुलंद की है, जो सराहनीय है. हालांकि, मोदी के प्रयासों से भारत की स्थिति में सुधार हुआ है, पर स्थायी सदस्यता के बिना यह प्रयास अधूरा है.
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दुनिया भर में शांति और सुरक्षा का वातावरण बनाये रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का गठन किया गया. स्थापना के समय से ही इसके कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किये जाते रहे हैं.
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, कमजोर हो जाने की वजह से अंगरेजों के लिए औपनिवेशिक देशों में दबदबा कायम रखना मुश्किल था. दुनिया भर में अपना दबदबा बनाये रखने के लिए मित्र राष्ट्रों ने एक नया रास्ता खोजा. सं रा सुरक्षा परिषद भी उसी रास्ते का हिस्सा प्रतीत होता है. भारत की स्थायी सदस्यता के बिना यह आज भी अधूरा है.
विनोद कुमार गुप्ता, ई-मेल से
