हमारा समाज लिंग के आधार पर स्त्री और पुरुष नामक दो वर्गो में बंटा है. इन दोनों वर्गो को समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिया गया है, परंतु एक ऐसा वर्ग भी है, जो समाज में उपहास का पात्र बना हुआ है.
वह किन्नरों का वर्ग है. न तो उन्हें समाज में कहीं सम्मान दिया जाता है और न ही किसी क्षेत्र में उन्हें किसी प्रकार का आरक्षण ही मिलता है. समाज के लोगों द्वारा उन्हें जो मिलता है, वह सिर्फ और सिर्फ तिरस्कार है, जो सामाजिक रूग्णता को दर्शाता है. अक्सर ट्रेन और सार्वजनिक स्थलों पर उनके साथ हिंसा और छेड़खानी की जाती है, जो खुद ही एक चिंता का विषय है.
किन्नरों में भी लोग बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. जरूरत इस बात की है कि उन्हें भी अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन का मौका दिया जाये. यदि उन्हें उचित मंच प्रदान किया जायेगा, तो वे भी विकास में अपना योगदान दे सकेंगे.
पंकज कुमार, रांची
