केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता छह फीसदी बढ़ा कर 113 फीसदी तक करने का निर्णय किया है. इससे केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और राज्य सरकार के कर्मचारियों के बीच खुशी की लहर दौड़ गयी है. इसका लाभ 103 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और राज्य कर्मचारियों को मिलेगा.
सरकार महंगाई के मुद्दे पर आयी है, लेकिन क्या महंगाई भत्ता बढ़ा देने से ही देश से महंगाई कम हो जायेगी? महंगाई भत्ता बढ़ने से देश की आबादी में से सिर्फ चार या पांच फीसदी लोगों को लाभ मिलेगा.
बाकी की 95-96 फीसदी जनता को इन पांच फीसदी लाभार्थियों का भार ङोलना पड़ेगा. इससे महंगाई कम होने के बजाय बढ़ेगी ही. एक ओर पेट्रोल-डीजल के मूल्य का अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम होने के बावजूद सरकार इसका लाभ देश की 95 फीसदी जनता को नहीं दिला पा रही है.
इसका भी लाभ पांच फीसदी लोगों तक ही सीमित है. सरकार को यह बताना होगा कि आखिर किस कारण उसे महंगाई भत्ता छह फीसदी और बढ़ाने की जरूरत पड़ी. क्या इन कर्मचारियों को आसमानी आफत का सामना करना पड़ रहा था? क्या उनके घरों के चूल्हे बुझने के कगार पर थे?
क्या चावल, दाल और गेहूं का दाम बढ़ गया या फिर उनके घरों में सब्जियां नहीं पहुंच रही थीं?क्या इन बाबुओं को किसानों की आत्महत्या का ईनाम दिया जा रहा है? क्या मजदूर-किसानों का इस देश से कोई संबंध नहीं है. किसानों की जिंसों का दाम बढ़ने पर देश में हंगामा खड़ा हो जाता है. आज महंगाई भत्ता बढ़ने पर हंगामा क्यों नहीं हो रहा है? सरकार को महंगाई भत्ता बढ़ाने पर हर हाल में रोक लगानी ही होगी. लाभ सबको दिया जाये.
अरविंद शर्मा, रांची
