झारखंड के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज रिम्स में छात्रों के दो गुटों के बीच मारपीट की घटना के बाद पढ़ाई बंद कर दी गयी है. छात्रवास को खाली करा लिया गया है. उपद्रव करने के आरोप में 25 छात्रों को सजा के तौर पर निलंबित कर दिया गया है. इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के दूरगामी प्रभाव दिखेंगे.
कठिन परिश्रम कर, प्रतियोगी परीक्षा पास कर छात्र-छात्रएं मेडिकल की पढ़ाई के लिए मेडिकल कॉलेज में आये हैं. लेकिन कुछ उपद्रवी छात्रों के कारण तमाम छात्रों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है. जब कॉलेज ही बंद रहेगा, तो कैसे होगी पढ़ाई. बिना पढ़ाई किये बेहतर चिकित्सक बनने की कल्पना भी नहीं की जा सकती. यह भी सच है कि अधिकांश छात्र-छात्रओं का कॉलेज की राजनीति से कोई मतलब नहीं रहता. वे सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देते हैं लेकिन चंद छात्र बाहरी-भीतरी और गुटों की राजनीति करने में दिलचस्पी रखते हैं. यह घटना भी इसी का परिणाम है.
कोई भी सभ्य समाज किसी दूसरे के खिलाफ भद्दी टिप्पणी करने या मारपीट करने की अनुमति नहीं दे सकता. अनुशासन के दायरे से बाहर जाकर कोई छात्र अगर ऐसी हरकत करता है, तो कानून अपना काम करेगा ही. रिम्स में मारपीट का पहले से माहौल बन रहा था. अगर समय रहते रिम्स प्रशासन चेत गया होता तो शायद इस मामले को बढ़ने से बचाया जा सकता था. ऐसे मामलों में दोनों गुटों के सीनियर और समझदार छात्रों को आगे आ कर मामले को सुलझाने का प्रयास करना चाहिए था. इसमें विलंब हुआ. अब इसकी कीमत सभी छात्र चुका रहे हैं. कॉलेज कब खुलेगा, पता नहीं.
जो रांची के बाहर के छात्र हैं, वे अपने घर लौट रहे हैं. कोई एक गुट नहीं, सभी इससे प्रभावित होंगे. मेडिकल कॉलेज पढ़ाई के लिए है, चिकित्सक बनने के लिए है, राजनीति करने के लिए नहीं, मारपीट और गुंडागर्दी करने के लिए नहीं. प्रशासन पूरे मामले की तह तक जांच कराये कि आखिर घटना के लिए दोषी कौन हैं. क्या मेडिकल कॉलेज के बाहर के नेताओं ने बहकाया, उकसाया. जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए चाहे वे किसी गुट के क्यों न हों. लेकिन यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि निदरेष इसमें फंसे नहीं. छात्रों की पढ़ाई बंद न हो. इसलिए जल्द से जल्द माहौल ठीक कर पढ़ाई आरंभ होनी चाहिए ताकि छात्रों का भविष्य खराब न हो.
