भारत में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी वाकई प्रशंसनीय है. सन 2006 में बाघों की संख्या 1411 थी. लग रहा था कि बाघ भारत से विलुप्त हो जायेंगे और हमारी आनेवाली पीढ़ी केवल उसे तस्वीरों में देख कर पहचानेगी, लेकिन 2014 की बाघों की गणना ने उम्मीद की एक नयी किरण जगायी है.
जहां कर्नाटक, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, असम और उत्तर प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ी है, वहीं ओड़िशा और झारखंड में बाघों की संख्या घटी है. इन दो राज्यों में भी झारखंड की हालत ज्यादा खराब है. 2010 में जहां झारखंड में बाघों की संख्या 10 थी, वही 2014 की गणना में सिर्फ तीन है.
झारखंड प्राकृतिक संपदा से समृद्ध राज्य है, यहा जंगल भी भरपूर है. फारेस्ट रिपोर्ट 2011 के अनुसार, यहां खुले जंगलों में बढ़ोतरी हुई है. फिर बाघों की संख्या कम क्यों हो रही है, यह विचारणीय है.
केतकी शर्मा, जमशेदपुर
