खंडित हो रहा है अखंड भारत

अखंड भारत अब खंड-खंड दिखायी दे रहा है. संविधान के अनुसार व्यक्ति के साथ प्रदेश, जात-पात, भाषा के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. सबके लिए अवसरों के द्वार खुले होने चाहिए, किंतु वास्तव में ऐसा होता नहीं दिख रहा है. नेता अपने हित साधने के लिए, वोट बैंक के लिए अवसरों को एक […]

अखंड भारत अब खंड-खंड दिखायी दे रहा है. संविधान के अनुसार व्यक्ति के साथ प्रदेश, जात-पात, भाषा के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. सबके लिए अवसरों के द्वार खुले होने चाहिए, किंतु वास्तव में ऐसा होता नहीं दिख रहा है.
नेता अपने हित साधने के लिए, वोट बैंक के लिए अवसरों को एक खास वर्ग के लिए सुरक्षित कर देते हैं. हमारे प्रधानमंत्री के इन बेड़ियों को तोड़ने के लिए उठाये गये कदम प्रशंसनीय हैं. प्रधानमंत्री का मंत्र कि ‘वोट विकास के लिए दो, जातीयता की संकीर्णता के विकास के लिए नहीं ’ सराहनीय है. महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री गैर मराठा हो सकता है, हरियाणा के मुख्यमंत्री का जाट होना जरूरी नहीं है और झारखंड का मुख्यमंत्री आदिवासी होना जरूरी नहीं. जरूरत बेड़ियों में बंधी मानसिकता को दूर करने की है, तभी भारत अखंड रह सकता है.
सत्य स्वरूप दत्त, जमशेदपुर

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