नशे का सेवन करना युवाओं की आदतों में शुमार होता जा रहा है. नशे के प्रति बढ़ती दीवानगी लोगों को मौत की ओर धकेल रही है. कोई शराब के सेवन के कारण मौत के गाल में समा रहा है, तो किसी जिंदगी की जिंदगी तबाह हो रही है. यह न केवल व्यक्ति और परिवार को बर्बाद कर रहा है, बल्कि भारतीय समाज के ताने-बाने को तहस-नहस कर रहा है.
इससे लोगों का चारित्रिक पतन होने के साथ ही सामाजिक विकृतियां और आपराधिक प्रवृत्तियों में भी बढ़ोतरी हो रही है. सबसे बड़ी बात यह भी है कि सबसे अधिक राजस्व वसूली के लिए सरकार भी नशीले पदार्थो के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध नहीं लगा रही है. हालांकि, कुछ राज्यों में नशीले पदार्थो की बिक्री व उत्पादन पर प्रतिबंध लगा है, लेकिन वहां पिछले दरवाजे से अब भी इसकी बिक्री हो रही है. जरूरत प्रतिबंध की नहीं, जागरूकता की है.
राहुल कुमार, दुमका
