नयी सरकार निबटे नक्सल चुनौती से

विधानसभा चुनाव खत्म होते ही नक्सली मांद से बाहर निकल आये हैं. उन्होंने चतरा जिले के इटखोरी में मां भद्रकाली मंदिर के पास पुलिस गश्ती दल पर हमला करके एक हवलदार को शहीद कर दिया और पुलिस बल को काफी नुकसान पहुंचाया. झारखंड में विधानसभा चुनाव के दौरान भारी संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की […]

विधानसभा चुनाव खत्म होते ही नक्सली मांद से बाहर निकल आये हैं. उन्होंने चतरा जिले के इटखोरी में मां भद्रकाली मंदिर के पास पुलिस गश्ती दल पर हमला करके एक हवलदार को शहीद कर दिया और पुलिस बल को काफी नुकसान पहुंचाया.
झारखंड में विधानसभा चुनाव के दौरान भारी संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी के चलते नक्सली एकदम से कहीं छिप गये थे. कुछ इसी तरह प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीएलएफआइ भी छिटपुट वारदातों को छोड़, चुपचाप था.
अब चुनाव नतीजे आने और केंद्रीय बलों की भीतरी इलाकों से वापसी के बाद ये उपद्रवी संगठन एक बार फिर से राज्य में जगह-जगह वारदात को अंजाम देने लगे हैं. उग्रवादी संगठनों ने हाल के दिनों में जिस तरह से खूनी खेल शुरू किया है, वह भविष्य के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है. इस तरफ राज्य पुलिस और अर्धसैनिक बलों के आला अधिकारियों को तुरंत ध्यान देना होगा. करीब दो महीने तक निश्चिंत रहने के बाद अब प्रशासन को उग्रवादी संगठनों की तरफ से किसी तरह से गाफिल होना जन-धन की हानि करायेगा. इधर, नक्सली संगठनों ने अपनी उपस्थिति का आभास कराने के लिए 27 दिसंबर को झारखंड बंद का एलान भी किया है. राज्य में बनने वाली नयी सरकार को यह मान लेना चाहिए कि हथियार के बल पर अपनी समानांतर सत्ता कायम करने और लेवी वसूल कर झारखंड को खोखला बनाने की मंशा वाले इन उपद्रवी तत्वों के साथ मान-मनुहार की बातें बहुत हो चुकीं.
अब तक की सरकारों ने इन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बहुत प्रयास किये. खूब नीतियां बनीं. सरेंडर करने कि लिए आकर्षक योजनाएं बनायी गयीं. लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात ही रहे. इस लिए अब राज्य में उग्रवादी संगठनों के खिलाफ जैसे को तैसा नीति की जरूररत आन पड़ी है. सत्ता को चुनौती देनेवाले इन उपद्रवी तत्वों को अब बरदाश्त नहीं किया जाना चाहिए. दरअसल उग्रवादियों का मनोबल इसी उदारता के चलते ही बढ़ता गया. ये यही सोचते हैं कि जब तक चाहो आतंक फैलाओ, फिर सरेंडर करके मजे करो. नक्सली हों या अन्य उपद्रवी तत्व, उन्हें उनके किये की कड़ी सजा दी जाये. झारखंड को अमन-चैन की जरूरत है.

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