ससुराल में सुरक्षित नहीं हैं बहुएं

एक ओर जहां हमारे भारतीय धर्मग्रंथों में ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता:’ कहा गया है, तो दूसरी तरफ 21वीं सदी में भी शादीशुदा लड़कियों की स्थिति काफी भयावह और घोर चिंताजनक नजर आ रही है. हर लड़की अपने ससुराल में पूरे परिवार के प्रेम के साथ शांत वातावरण में जीवन गुजारना चाहती है, लेकिन […]

एक ओर जहां हमारे भारतीय धर्मग्रंथों में ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता:’ कहा गया है, तो दूसरी तरफ 21वीं सदी में भी शादीशुदा लड़कियों की स्थिति काफी भयावह और घोर चिंताजनक नजर आ रही है. हर लड़की अपने ससुराल में पूरे परिवार के प्रेम के साथ शांत वातावरण में जीवन गुजारना चाहती है, लेकिन दहेज के रूप में लाखों रुपये के सामान देने के बावजूद वह प्रताड़ित होती है.
लोग नित्य नारी स्वरूपिणी दुर्गा की पूजा तो करते हैं, लेकिन बहूरानी को सुखी देखना उन्हें नहीं सुहाता. सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि बहूरानी को परिवार के सदस्य के रूप में मानना चाहिए न कि उसके साथ नौकरानी का सा व्यवहार करना चाहिए. सरकार को ऐसी स्थिति पर आत्मचिंतन कर ऐसा कानून बनाना चाहिए. वहीं समाज को सोचना चाहिए कि नारी-पूजा का सच्च अर्थ क्या है.
परमेश्वर झा, दुमका

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