अभी पेशावर के स्कूल में तालिबानी हमला हुआ, तो आतंकवाद के खात्मे को लेकर दुनिया के देशों के कान खड़े हो गये हैं. भले सभी एकजुटता दिखा रहे हैं, लेकिन सवाल यह पैदा होता है कि आखिर तालिबान को क्रूर किसने बनाया. अमेरिका ने अपने स्वार्थ की खातिर तालिबान को खड़ा किया.
1978 में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया, तो उससे लड़ने के लिए अमेरिका ने अफगानिस्तान के मदरसों के तुल्बा (विद्यार्थियों) को जिहाद का पाठ पढ़ाना शुरू किया. तालिबान को खड़ा करने के लिए पाकिस्तान में ट्रेनिंग कैंप खोले गये. आज वही तालिबान दुनिया में आतंक फैला रहा है. पेशावर में मरने वाले एक स्कूली बच्चे के पिता ने तालिबान को समाप्त करने के लिए सरकार को ललकारा. उसके सवाल जायज हैं, लेकिन अदृश्य चीज से लड़ना आसान नहीं होता.
सतीश सिंह, रांची
