एक बार फिर शहर पर भारी पड़े गांव

झारखंड विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हो गया. कुछ जगहों पर हल्की नोंकझोंक और झड़प को छोड़ दें, तो कहीं से कोई अप्रिय घटना की खबर नहीं है. सात जिलों के 17 विधानसभा क्षेत्रों के कुल 289 प्रत्याशियों के भाग्य इवीएम में बंद हो गया. लोकतंत्र के इस महापर्व को सफलतापूर्वक […]

झारखंड विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हो गया. कुछ जगहों पर हल्की नोंकझोंक और झड़प को छोड़ दें, तो कहीं से कोई अप्रिय घटना की खबर नहीं है. सात जिलों के 17 विधानसभा क्षेत्रों के कुल 289 प्रत्याशियों के भाग्य इवीएम में बंद हो गया. लोकतंत्र के इस महापर्व को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के भी व्यापक प्रबंध किये गये थे. करीब 34 हजार जवान चुनाव कार्य में लगाये गये थे.

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग और चतरा में विशेष सुरक्षा के इंतजमा किये गये थे. इन इलाकों में भी लोगों ने भारी मतदान करके लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी गहरी आस्था व्यक्त की. नक्सलियों के चुनाव बहिष्कार की धमकी के बावजूद वोटरों ने मतदान के प्रति भारी व अप्रत्याशित उत्साह दिखाते हुए वोट डाले. ग्रामीण क्षेत्रों में भी वोटरों मे जम कर वोटिंग की.

इस चुनाव की खासियत यह भी रही कि लोगों ने वीवीपैट का भी इस्तेमाल किया. शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लोग कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते देखे गये. हांलांकि सुबह से समय ठंड की वजह से मतदान की गति थोड़ी धीमी रही, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया वोटरों की संख्या में भी इजाफा होता गया. सिल्ली और रामगढ़ में क्रमश: 74 प्रतशित और 70.8 प्रतिशत मतदान हुआ. इसका मतलब साफ है कि यहां लोगों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास किया और तमाम बाधाओं को दरकिनार कर अपने कर्तव्य का निर्वाह किया. मतदान के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास रंग लाया.

नतीजा सामने है. शहरी इलाका हो या ग्रामीण, दोनों ही जगहों पर वोटरों का घर से निकलना और बूथों तक जाना निश्चित रूप से जागरूकता का ही परिणाम है. बहरहाल, तीसरे चरण का मतदान खत्म हो चुका है. इसके साथ ही राज्य की कुल 50 सीटों पर मतदान संपन्न हो चुका है. ऐसे में राजीतिक दलों को भी यह अंदाज लग चुका होगा कि ऊंट किस करवट बैठेगा. लेकिन इसके साथ ही बड़ा सवाल यह है कि क्या वोटरों का यह उत्साह शेष दो चरणों में भी देखने को मिलेगा. क्या सुरक्षा व्यवस्था भी ऐसी ही दुरुस्त रहेगी. चुनाव कार्य में लगी तमाम एजेंसियों को इन पर गौर करना होगा. नहीं तो छोटी चूक से बड़ा बवंडर हो सकता है.

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