चुनाव के नाम पर इतना शोर क्यों?

इन दिनों राज्य में जारी विधानसभा चुनाव के चलते हर गली, हर मोहल्ले, हर सोसाइटी में इतना शोर हो रहा है कि पढ़ाई-लिखाई तो क्या, कोई भी काम करने का मन ही नहीं करता. प्रचार के नाम पर विभिन्न गाड़ियों में लगे कानफोड़ू चोंगे और उनसे बजते तरह-तरह के गाने और भाषणबाजियां. क्या यह जनता […]

इन दिनों राज्य में जारी विधानसभा चुनाव के चलते हर गली, हर मोहल्ले, हर सोसाइटी में इतना शोर हो रहा है कि पढ़ाई-लिखाई तो क्या, कोई भी काम करने का मन ही नहीं करता. प्रचार के नाम पर विभिन्न गाड़ियों में लगे कानफोड़ू चोंगे और उनसे बजते तरह-तरह के गाने और भाषणबाजियां.
क्या यह जनता को याद दिलाने के लिए है कि फलां दिन फलां पार्टी के फलां प्रत्याशी को वोट जरूर करें? आम लोग इनकी बातों में आकर इन्हें वोट दे भी आते हैं, लेकिन चुनाव जीत जाने के बाद ये लोग खुद को जनता का सेवक तो कहते हैं, लेकिन जनता को भूल जाते हैं. फिर इन्हें पांच साल बाद जनता की याद आती है. क्या ऐसा प्रावधान भी नहीं होना चाहिए कि जनता भी अपने चुने नेता के कानों में भोंपू बजा कर उन्हें उनके कर्तव्य के प्रति सचेत करें. अगर यह संभव नहीं है तो नेता बेवजह शोरगुल बंद करें.
सुदीप्ता दास, जमशेदपुर

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