कहां गये झारखंड के 2215 करोड़ रुपये?

अभी हमने शहीद बिरसा मुंडा का 139वां जन्मदिन और झारखंड का 14वां स्थापना दिवस मनाया है और आगे भी मनाते रहेंगे. लेकिन इन दोनों उत्सवों के बीच अहम सवालों को एक साजिश के तहत दबा दिया जाता है और यह सवाल है यहां के विकास का. यहां के रहनुमा बने राजनेता यही चाहते हैं कि […]

अभी हमने शहीद बिरसा मुंडा का 139वां जन्मदिन और झारखंड का 14वां स्थापना दिवस मनाया है और आगे भी मनाते रहेंगे. लेकिन इन दोनों उत्सवों के बीच अहम सवालों को एक साजिश के तहत दबा दिया जाता है और यह सवाल है यहां के विकास का.

यहां के रहनुमा बने राजनेता यही चाहते हैं कि विकास से जुड़े सवालों को दबे रहने दिया जाये. इसका खुलासा होने पर उनके दावों की पोल खुल जायेगी. मेरा इन नेताओं से सिर्फ एक ही सवाल है कि झारखंड राज्य के गठन के समय सरकारी खजाने में 2215 करोड़ रुपये की राशि शेष थी, लेकिन आज जब बिरसा मुंडा जी का जन्मदिन और राज्य का स्थापना दिवस मनाया जा रहा था, तो इस राज्य पर 34,868 करोड़ रुपये का कर्ज था.

सवाल यह उठता है कि आखिर वह 2215 करोड़ रुपये गये तो कहां गये? इन चौदह सालों में न तो कोई मेडिकल कॉलेज खुला, न ढंग का अस्पताल और न ही कोई तकनीकी संस्थान, तो फिर इतनी राशि किस मद में खर्च की गयी. इस सवाल का जवाब झारखंड का कोई नहीं देता. वहीं, विपक्ष भी इन सवालों पर मौन साधे हुए है.

बात-बात पर विधानसभा में कुर्ता फाड़नेवाले नेता भी खामोश हैं. इसका कारण यह है कि आज विपक्ष में बैठनेवाला कल सत्ताधारी था और हो सकता है कि कल फिर सत्ताधारी हो. इसीलिए वे सभी मौन हैं. नेता भले इन सवालों पर चुप रहें, लेकिन अब यहां की जनता चुप नहीं रहेगी. हालांकि कोई जीते या फिर कोई हारे, लेकिन झारखंड की बर्बादी तय है. मगर फिर भी जल, जंगल, जमीन, रोजगार, सिंचाई, प्राकृतिक संपदा आदि पर बहस होना अभी बाकी है. जनता जब जागेगी, तो सभी सवालों का जवाब भी देंगे और बहस में शामिल भी होंगे.

गणोश सीटू, ई-मेल से

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