बैंक कर्मचारियों का व्यवहार असहिष्ण

आज जहां केंद्र सरकार देश के गरीबों के खाते बैंक में खुलवाने के लिए जन-धन योजना चला रही है, वहीं बैंक के कर्मचारी और अधिकारी ग्राहकों के प्रति अनुदार और असहिष्णु दिखायी देते हैं. खास कर एक बड़े सरकारी बैंक के कर्मचारियों की स्थिति तो और भी बदतर है. ऐसा देखा जाता है कि बैंक […]

आज जहां केंद्र सरकार देश के गरीबों के खाते बैंक में खुलवाने के लिए जन-धन योजना चला रही है, वहीं बैंक के कर्मचारी और अधिकारी ग्राहकों के प्रति अनुदार और असहिष्णु दिखायी देते हैं. खास कर एक बड़े सरकारी बैंक के कर्मचारियों की स्थिति तो और भी बदतर है.

ऐसा देखा जाता है कि बैंक से निकासी कराने या फिर पासबुक अपडेट करानेवालों को काउंटरों पर घंटों लंबी कतार में खड़ा रहना पड़ता है और कर्मचारी अपनी बातों में मशगूल रहते हैं. टोका-टाकी करने पर उल्टे वे ग्राहकों पर ही बरसने लगते हैं. इतना ही नहीं, जब आप पैसे की निकासी के लिए बैंक के एटीएम पर जाते हैं, तो वहां सौ रुपये के नोट कभी नहीं मिलते. इससे जिनके खाते में कम पैसे रहते हैं, उन्हें परेशानी हो जाती है. कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि इससे कहीं बेहतर टोकन से ही निकासी थी.

परमेश्वर झा, दुमका

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