‘मन की बात’ काका के मन को नहीं भायी

लोकनाथ तिवारी,प्रभात खबर, रांची जब से काका ने प्रधानमंत्री जी के ‘मन की बात’ सुनी है. तब से उनका छुहारे सा पिचका मुंह और सुसक गया है. बेचारे कब से आस लगाये थे कि विदेशी बैंको में रखा अपने देश का लाखों करोड़ रुपये का काला धन वापस आयेगा. हर आदमी को 15-15 लाख मिलेंगे. […]

लोकनाथ तिवारी,प्रभात खबर, रांची

जब से काका ने प्रधानमंत्री जी के ‘मन की बात’ सुनी है. तब से उनका छुहारे सा पिचका मुंह और सुसक गया है. बेचारे कब से आस लगाये थे कि विदेशी बैंको में रखा अपने देश का लाखों करोड़ रुपये का काला धन वापस आयेगा. हर आदमी को 15-15 लाख मिलेंगे. गरीबों की गरीबी सिरे से मिट जायेगी और वे भी लखपतियों की तरह रहने लगेंगे. लेकिन यह क्या? प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के दौरान जनता को संबोधित करते हुए कहा कि ‘‘कोई नहीं जानता कि विदेश में कितना काला धन छुपाया गया है. न आपको पता है, न सरकार को, न पहले की सरकार को पता था. सभी अपने-अपने आंकड़े पेश कर रहे हैं.’’ अब तक मोदी की हर बात पर भरोसा करते आये काका को मोदी की इस बात पर भरोसा करने का तनिक भी जी नहीं कर रहा है.

उन्होंने बड़बड़ाते हुए कहा कि अनुलोम-विलोम और जड़ी-बूटी वाले बाबा रामदेव ने तो आंखों से पूरा काम लेते हुए जनता को विश्वास दिलाया था कि विदेश में हमारे देश का इतना काला धन है कि सभी गरीबों की गरीबी मिट जायेगी. अब ऐसा क्या हो गया कि काले धन के आंकड़े का पता नहीं चल पा रहा है? चुनाव के समय तो ऐसा लग रहा था, जैसे ऑडिट करा कर काले धन की पाई-पाई का हिसाब निकाल लिया गया हो. काका की मायूसी भी समझ में आती है, लेकिन क्या किया जा सकता है. मन की बात से काका भले ही दुखी हो गये हैं, लेकिन अपने दिग्गी राजा को मुखर होने का एक मौका मिल गया है.

उन्होंने सीधे-सीधे मोदी से माफी की मांग कर डाली. दिग्विजय ने कहा कि मोदी ने देश से झूठ बोला है और इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए. दिग्गी राजा की तरह ही एक और तबका प्रफुल्लित हो उठा है. यह तबका है वरिष्ठ वकीलों का. इनका मानना है कि सरकार काले धनवालों की सूची जैसे ही उजागर करेगी, उनका धंधा चमक उठेगा. सभी काले धन वाले अदालत की शरण में जरूर जायेंगे. ऐसे में उनकी चांदी ही चांदी होगी. उनको लग रहा होगा कि अब काला धनवाले क्लाइंटों से ही उनको फुरसत नहीं मिलेगी.

सुनने में आया है कि सरकार भी दुविधा में है. उस पर तरह-तरह के दबाव पड़ने लगे हैं. काला धनवालों का नाम गुप्त रखने की मजबूरी देख कर अब मामूली पॉकेटमार व चोर भी पुलिसवालों से कहने लगे हैं कि उनका नाम गुप्त रखा जाये. उसे सरेआम गिरफ्तार नहीं किया जाये. आखिर वह भी देश का उतना ही सम्मानित नागरिक है, जितना कि अपने काले धन वाले. अंतर तो बस इतना है कि उसने अपना धन भारतीय बैंक में रखने की कमअक्ली दिखायी. विदेशों में जमा कर देता तो आज वह भी खास तबके में गिना जाता. अपने वातानुकूलित आवास में बैठ कर वह भी प्रधानमंत्री की मन की बात सुनता और उन पर भरपूर भरोसा दिखाता.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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