नहीं हो रही है बालूघाटों की नीलामी

मैं एक गरीब आदिवासी हूं. हमारे जिले सरायकेला-खरसावां में अभी तक बालूघाटों की नीलामी नहीं हुई है. इससे विकास कार्य पूरी तरह से ठप तो है ही, मजदूरों की आमदनी भी बंद है. यहां के आदिवासियों को अभी हाल ही में इंदिरा आवास आवंटित हुआ है. बालू की कमी के कारण हम लोगों के घर […]

मैं एक गरीब आदिवासी हूं. हमारे जिले सरायकेला-खरसावां में अभी तक बालूघाटों की नीलामी नहीं हुई है. इससे विकास कार्य पूरी तरह से ठप तो है ही, मजदूरों की आमदनी भी बंद है. यहां के आदिवासियों को अभी हाल ही में इंदिरा आवास आवंटित हुआ है. बालू की कमी के कारण हम लोगों के घर का सपना अधूरा है. बाहर से आनेवाल बालू काफी महंगे दामों पर बिक रहा है. बरसात में भारी बारिश होने के कारण लोगों के मिट्टी के घर गिर गये हैं.

लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही घर बन जाने के बाद आवास की समस्या समाप्त हो जायेगी, लेकिन महंगे बालू के कारण लोगों के सामने आवास का संकट उत्पन्न हो गया है. हालांकि इस विषय पर मैंने व्यक्तिगत तौर पर राज्यपाल महोदय और मुख्यमंत्री साहब को भी पत्र लिखा है, लेकिन अभी तक समुचित कार्रवाई नहीं की गयी है.

संजय सोरेन, चांडिल

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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