सेनाओं का मनोबल बढ़ाने का फैसला

भारतीय सेनाओं को आधुनिक हथियारों से लैस करने के उद्देश्य से मोदी सरकार के पहले बड़े फैसले में प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ मंत्र की स्पष्ट छाप दिखी. रक्षा मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने करीब 80 हजार करोड़ रुपये की खरीद को मंजूरी दी, जिसमें 50 हजार करोड़ की लागत […]

भारतीय सेनाओं को आधुनिक हथियारों से लैस करने के उद्देश्य से मोदी सरकार के पहले बड़े फैसले में प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ मंत्र की स्पष्ट छाप दिखी. रक्षा मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने करीब 80 हजार करोड़ रुपये की खरीद को मंजूरी दी, जिसमें 50 हजार करोड़ की लागत से देश में में छह अत्याधुनिक पनडुब्बियों के निर्माण का प्रस्ताव शामिल है. मौजूदा पनडुब्बियों के पुराने होने के चलते पिछले कुछ वर्षों से हमारी नौसेना की क्षमता में चिंताजनक कमी आयी है. सिंधुरक्षक और सिंधुरत्न पनडुब्बियों में हाल में हुई दुर्घटनाओं ने इस चिंता को और बढ़ा दिया था. पिछली सरकार के दौरान समय पर फैसले न ले पाने के चलते रक्षा खरीद और सेनाओं के आधुनिकीकरण के मामले में ठहराव की स्थिति बन गयी थी. जरूरी रक्षा खरीद में विलंब व आधुनिकीकरण की उपेक्षा से सेना के मनोबल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इस पृष्ठभूमि में सरकार का यह निर्णय सराहनीय है.

विदेशी खरीद के तहत सिर्फ इस्राइल से करीब 32 हजार करोड़ के 8,356 टैंकरोधी मिसाइल, 321 मिसाइल लॉंन्चर और 15 प्रशिक्षण सिमुलेटर खरीदे जायेंगे. इसमें तकनीक हस्तांतरण भी शामिल है. भारत विदेशी रक्षा उपकरणों का बड़ा आयातक है. जबकि, देश में ही अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा मिलने से न सिर्फ हमारी तकनीकी क्षमता का बेहतर उपयोग हो सकेगा, बल्कि आर्थिक लाभ और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव अभियान में देश में ही रक्षा-निर्माण को प्रोत्साहित करने का वादा किया था. इस दिशा में जुलाई में जेटली ने रक्षा अधिग्रहण परिषद की पहली बैठक में ही करीब 20 हजार करोड़ के निर्माण को मंजूरी दी थी, जिनमें निजी क्षेत्र की कंपनियों को शामिल करने का प्रस्ताव था. जेटली, जो कि वित्त मंत्री भी हैं, ने अपने पहले बजट में रक्षा आवंटन में वृद्धि के साथ रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 26 से बढ़ा कर 49 फीसदी भी कर दी थी. रक्षा चुनौतियों का सामना करने के मामले में पिछले कई वर्षों के नीतिगत ठहराव को तोड़ने वाली ये पहलें महत्वपूर्ण हैं. पड़ोस में परमाणु बम से लैस और अक्सर उकसानेवाली हरकतें करनेवाले दो देशों की मौजूदगी को देखते हुए देश की सुरक्षा में कोताही नहीं बरती जा सकती.

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