इस राज्य के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री बयानबाजी तो खूब करते हैं, लेकिन बात काम करने की आती है तो नतीजा सिफर होता है. इसका ज्वलंत उदाहरण है शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) पास छात्रों की बहाली. इसके बारे में अनगिनत बयान और आश्वासन दिये गये, लेकिन कभी कुछ नहीं होता. सरकार हर रोज नये-नये आदेश जारी कर रही है, उससे यही लगता है कि सरकार चाहती ही नहीं है कि बहाली प्रक्रिया पूरी हो.
सरकार के मुखिया और शिक्षा विभाग के कर्ता-धर्ता उन छात्रों की मनोदशा को समझें, जो सालों से शिक्षक बनने की आस लिये बैठे हैं. इस मामले में अन्य राज्यों से सीख लेने की जरूरत है. बहाली की प्रक्रिया हर बार इस हद तक पेचीदा कर दी जाती है कि टेट रद्द होने के कगार पर पहुंच जाता है. अब भी समय है, राज्य के हजारों स्कूली बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ न करें.
अंशुलता सिंह, जमशेदपुर
