..ताकि ऐसा दोबारा न हो

पिछले दिनों कोल्हान विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की पिटाई की घटना शिक्षा संस्थानों पर एक धब्बा है. ऐसा करनेवाले समाज विरोधी तत्व छात्र नहीं कहे जा सकते. इनके खिलाफ सरकार और उपकुलपति को कठोरता से पेश आना चाहिए. छात्र हिंसक प्रतिक्रिया क्यों कर रहे हैं, इसे समझने की जरूरत है. सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और […]

पिछले दिनों कोल्हान विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की पिटाई की घटना शिक्षा संस्थानों पर एक धब्बा है. ऐसा करनेवाले समाज विरोधी तत्व छात्र नहीं कहे जा सकते. इनके खिलाफ सरकार और उपकुलपति को कठोरता से पेश आना चाहिए. छात्र हिंसक प्रतिक्रिया क्यों कर रहे हैं, इसे समझने की जरूरत है.

सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और कानून के प्रति सम्मान में बड़ी कमी आयी है. सामान्य सरकारी तंत्र ने लोगों का विश्वास खो दिया है. युवाओं में निराशा और क्रोध है. सरकार को इनका विश्वास पाना चाहिए. देश में डॉ एस राधाकृष्णन और डॉ अब्दुल कलाम जैसे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्ध शिक्षक/विद्वान हुए हैं, हमारे पास आइआइटी हैं, हमने नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित किया है. हम अपनी शिक्षा संस्थान, कुछ गुंडों को नष्ट करने के लिए अनुमति नहीं दे सकते.

हराधन मुखोपाध्याय, जमशेदपुर

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