खास बनते ही भूल जाते हैं आम को

हम जैसे आम लोग ही किसी को खास बना कर अपने भविष्य को उनके हाथों सौंप देते हैं. लेकिन वे खास बनते ही हम आम इनसान का दर्द भूल जाते हैं. रोजमर्रा की जिंदगी में व्याप्त कुव्यवस्थाओं के बीच हम आम इनसान कितना आहत होते हैं, इसे खास लोग क्या समझेंगे! संतरी से लेकर मंत्री […]

हम जैसे आम लोग ही किसी को खास बना कर अपने भविष्य को उनके हाथों सौंप देते हैं. लेकिन वे खास बनते ही हम आम इनसान का दर्द भूल जाते हैं.

रोजमर्रा की जिंदगी में व्याप्त कुव्यवस्थाओं के बीच हम आम इनसान कितना आहत होते हैं, इसे खास लोग क्या समझेंगे! संतरी से लेकर मंत्री तक के स्तर पर रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का हाल किसी से छिपा नहीं है.लेकिन कोई भी नेता, कोई भी सरकार इस व्यवस्था को बदलने की कोशिश नहीं करती. इसके विपरीत, वे खुद इस भ्रष्ट व्यवस्था के अंग बन जाते हैं.

अगर ऐसा ही होता रहा तो हमारा देश महान कैसे बन पायेगा? हम सिर्फ इंतजार और उम्मीद में ही दिन गुजार दे रहे हैं और गुजारते ही जा रहे हैं. हम आम इनसानों के दर्द की निवारक जादू की छड़ी जिन लोगों के हाथों में है, वे उसका इस्तेमाल हमारे लिए न जाने कब करेंगे?

नेहा पांडेय, निरसा, धनबाद

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >