आम आदमी की उम्मीदवारी क्यों नहीं?

सभी प्रमुख सरकारी पदों पर प्राय: नौकरशाह ही नियुक्त किये जाते हैं. परंतु हाल में ही सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति के विवाद के विषय में सर्वोच्च न्यायलय ने सरकार से पूछा कि इन पदों के लिए आम आदमी क्यों नहीं हकदार है, जबकि संविधान इसकी इजाजत देता है. यह कदम स्वागतयोग्य है. सभी पदों की […]

सभी प्रमुख सरकारी पदों पर प्राय: नौकरशाह ही नियुक्त किये जाते हैं. परंतु हाल में ही सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति के विवाद के विषय में सर्वोच्च न्यायलय ने सरकार से पूछा कि इन पदों के लिए आम आदमी क्यों नहीं हकदार है, जबकि संविधान इसकी इजाजत देता है. यह कदम स्वागतयोग्य है.

सभी पदों की नियुक्ति में पारदर्शिता होनी चाहिए. आम आदमी जिनमें आवश्यक योग्यता हो, जो अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभा सकें, उन्हें पद मिले. सभी मंत्रलयों के प्रमुख पदों पर भी खुली नियुक्ति हो, प्रत्येक मंत्रलय में संबंधित विषय के ज्ञाता को ही नियुक्त किया जाये, न कि सिर्फ नौकरशाहों को मौका मिले. अंगरेजों द्वारा बनायी गयी इस व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है. प्रशासन को इस पर ध्यान देने की जरूरत है. जन-जन के हाथों में सत्ता की बागडोर होनी चाहिए. यही आजादी एवं सच्चे लोकतंत्र के मायने होंगे.

आशुतोष, बोकारो

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