पिछले दिनों अभिमत पन्नों पर प्रकाशित ‘रोजगार की बारिश और हमारी शिक्षा’ तथा ‘सुस्ती सरकार की और भुगतेंगे छात्र’ पढ़ा. दोनों लेख बेहतरीन और सामंजस्य वाले प्रतीत हुए. एक तरफ सरकार की विफलता पर कोर्ट के आदेश से शिक्षकों की भरती पुन: रु क गयी, तो दूसरी तरफ रोजगार की बारिश करने के लिए सरकार द्वारा उठाये गये कदम सराहनीय हैं.
लेकिन समुचित शिक्षा के लिए स्कूल-कॉलेजों के साथ-साथ योग्य शिक्षकों की कमी के प्रति सरकारी तंत्र जानते हुए भी खामोश है, यह अति चिंता का विषय है. भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार को इससे निबटने के लिए युद्ध स्तर पर स्कूल, कॉलेज का निर्माण, योग्य शिक्षकों की भरती करने का जल्द निर्णय लेना चाहिए. इसमें गैर सरकारी संस्थानों का भी समुचित उपयोग करना चाहिए. शिक्षा को रोजगारपरक बनाने की कोशिश होनी चाहिए.
राहुल कुमार, सिमडेगा
