पिछले दिनों आपके अखबार के नॉलेज पन्ने पर नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में छपी सामग्री अच्छी लगी. नालंदा विश्वविद्यालय का खंडहर आज भी उस भीषण त्रासदी की याद दिलाता है, जिसमें बख्तियार खिलजी ने विश्वविद्यालय में आग लगा दी थी और भारतीय संस्कृति की धरोहर लाखों पोथियों को जला दिया था.
नालंदा के भग्नावशेष के पास ही एक रेलवे स्टेशन है बख्तियारपुर, जो कुख्यात दस्यु का जीवंत स्मारक बन कर जनता को चिढ़ाने का काम कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य सक्षम लोगों से मेरी मांग है कि इस स्टेशन का नाम बदला जाये और वहीं के स्वतंत्रता सेनानी पंडित शीलभद्र के नाम पर इसका नामकरण हो. गरम दल और नरम दल में सक्रिय रहे पंडित शीलभद्र का जीवन देशभक्ति और समाज सेवा की मिसाल रहा है.
डॉ बच्चन पाठक, आदित्यपुर, जमशेदपुर
