झारखंड की उम्मीदें

विधानसभा चुनाव में अपने गठबंधन की जीत के बाद भावी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि राज्य के लिए यह एक नया अध्याय है और यह अध्याय एक मील का पत्थर साबित होगा. जनता की भी यही उम्मीद है और इसी वजह से उन्हें जनादेश हासिल हुआ है. उनके सामने कई चुनौतियां हैं. प्राकृतिक […]

विधानसभा चुनाव में अपने गठबंधन की जीत के बाद भावी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि राज्य के लिए यह एक नया अध्याय है और यह अध्याय एक मील का पत्थर साबित होगा. जनता की भी यही उम्मीद है और इसी वजह से उन्हें जनादेश हासिल हुआ है. उनके सामने कई चुनौतियां हैं. प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से झारखंड एक बहुत धनी राज्य है, लेकिन करीब 37 फीसदी जनता आज भी गरीबी रेखा से नीचे बसर करने के लिए बेबस है. जब राज्य का गठन हुआ था, उसे गरीब राज्य की श्रेणी में रखा गया था.

लगभग दो दशक बाद भी स्थिति में संतोषजनक सुधार नहीं हो सका है. राज्य को करीब 50 लाख मेट्रिक टन अनाज की सालाना जरूरत होती है, परंतु बेहतर हालत में भी स्थानीय उत्पादन 40 लाख मेट्रिक टन से अधिक नहीं हो पाता है. बेरोजगारी के मामले में राज्य पांचवे पायदान पर है. हर पांच में से एक युवा के पास रोजगार नहीं है. लगभग आधे स्नातकों व परास्नातकों के पास काम नहीं है.
पलायन रोकने की चुनौती भी नयी सरकार के सामने होगी. शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के मामले में आदिवासी समुदायों की स्थिति अधिक चिंताजनक है. ये वैसी समस्याएं हैं, जिनके समाधान की अपेक्षा गरीब से लेकर मध्य वर्ग तक को होती है. यह किसी भी सरकार का भी प्राथमिक दायित्व है कि वह बुनियादी सेवाओं और सुविधाओं को प्राथमिकता दे.
सोरेन युवा भी हैं और अनुभवी भी. वे समस्याओं को जानते-समझते हैं तथा इन्हें सुलझाने की क्षमता भी रखते हैं. उन्होंने बेरोजगारी दूर करने पर विशेष ध्यान देने का भरोसा भी दिलाया है. हालांकि बीते सालों में उग्रवादी हिंसा में कमी आयी है, पर इस पर पूरी तरह काबू करना नयी सरकार के लिए आसान नहीं होगा. इसके अलावा अपराधों, खासकर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ, पर अंकुश लगाने पर भी सोरेन सरकार को पूरा ध्यान देना चाहिए.
प्राकृतिक संसाधनों का लाभ राज्य की जनता को मिले, इसे सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है. एक तरफ नये कल्याण कार्यक्रमों के लिए धन जुटाना, किसानों को कर्ज से राहत दिलाना तथा राजस्व का बेहतर प्रबंधन करना जैसी चुनौतियां हैं, तो दूसरी तरफ राज्य के मौजूदा कर्ज से निबटना भी मुश्किल काम है.
झारखंड को भी बड़ी विकास परियोजनाओं की दरकार है. शासन व प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार की शिकायतें इसके गठन के समय से ही चर्चा में रही हैं. इस बीमारी को दूर कर ही शासन, प्रशासन और औद्योगिक गतिविधियों को पारदर्शी बनाया जा सकता है. लोकतंत्र में विपक्षी दलों, नागरिक संगठनों और मीडिया की अहम भूमिका होती है.
इनके साथ सकारात्मक संबंध स्थापित करना सरकार का दायित्व है. आलोचनाओं और सुझावों का समुचित संज्ञान लेना तथा शासकीय तंत्र की सुलभ उपलब्धता सरकार की सफलता के मंत्र हैं. आशा है कि इन आयामों पर भी सरकार समुचित ध्यान देगी तथा झारखंड विकास की राह पर अग्रसर होता रहेगा.

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