अनेकता में एकता पर सवाल!

सीएबी यानी सिटीजन अमेंडमेंट बिल (नागरिकता संशोधन विधेयक) के पास होन के बाद क्या भारत की अनेकता में एकता पर सवाल नहीं उठेगा? इस सवाल का जवाब ढूंढना ज्यादा मुश्किल नहीं है. बस जिन लोगों पर इसका असर पड़ेगा, उनकी जगह पर खुद को रखना होगा और जवाब मिल जायेगा. खैर, इस बिल के पारित […]

सीएबी यानी सिटीजन अमेंडमेंट बिल (नागरिकता संशोधन विधेयक) के पास होन के बाद क्या भारत की अनेकता में एकता पर सवाल नहीं उठेगा?
इस सवाल का जवाब ढूंढना ज्यादा मुश्किल नहीं है. बस जिन लोगों पर इसका असर पड़ेगा, उनकी जगह पर खुद को रखना होगा और जवाब मिल जायेगा. खैर, इस बिल के पारित होने के बाद जब यह कानून का रूप ले लेगा, तब भारत में जो परिवर्तन होगा, उसे तो हम समझ जायेंगे. मगर भारत के बाहर यानी बांग्लादेश और पाकिस्तान में जो हिंदू हैं, उन पर इसका क्या असर होगा, इसे भी समझना जरूरी है.
इस बिल को अपनाने के साथ कहीं हम जिन्ना की ‘टू नेशन थ्योरी’ को ही तो नहीं अपना रहे? इस पर भी विचार करना जरूरी है. क्योंकि इसका परिणाम अंत में भुगतना आम आदमी को ही है. इस बिल के पास होने के बाद एक बहुत बड़ी आबादी की अदला-बदली होगी. उम्मीद है कि यह सब सोचकर ही सरकार ने इस बिल को लाने का फैसला किया होगा.
अमर कुमार यादव, धनबाद, झारखंड

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