न करें बुजुर्गों का तिरस्कार

वर्तमान भारत में अनेक वृद्ध अपने ही परिजनों का तिरस्कार झेल रहे हैं. जिसकी मुख्य वजह है आधुनिकीकरण, कामकाजी लोगों का स्थानांतरण और युवाओं का शहरों की ओर पलायन. अपने बड़ों के प्रति आदर और सम्मान भी अब छूटता जा रहा है. साथ भोजन करना, कार्यक्रमों में एवं बाहर घूमने जाने में अपने माता-पिता को […]

वर्तमान भारत में अनेक वृद्ध अपने ही परिजनों का तिरस्कार झेल रहे हैं. जिसकी मुख्य वजह है आधुनिकीकरण, कामकाजी लोगों का स्थानांतरण और युवाओं का शहरों की ओर पलायन. अपने बड़ों के प्रति आदर और सम्मान भी अब छूटता जा रहा है. साथ भोजन करना, कार्यक्रमों में एवं बाहर घूमने जाने में अपने माता-पिता को साथ ले जाने से कतराने की सोच बढ़ रही है. वृद्ध माता-पिता अपने बच्चों से देखभाल की उम्मीद करते हैं.
अगर हम उनके प्रति अनदेखी करेंगे, तो हमारे बच्चे भी उसी का अनुसरण करेंगे. युवाओं को चाहिए कि अपनी भाग-दौड़ भरी जिंदगी में अपने माता-पिता के लिए कुछ समय निकालें. परिजन अपने घर के वृद्ध लोगों का तिरस्कार न करें, क्योंकि बुजुर्ग ही परिवार एवं आशीर्वाद के उत्पत्ति केंद्र हैं.
संजय वर्मा, मनावर, मध्य प्रदेश

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