हाल में संसद ने एक नयी श्रम संहिता को स्वीकृति दी है. इसमें श्रम नीति के तमाम प्रावधानों को सुसंगत किया गया है और अन्य कई बदलाव भी किये गये है.
मगर आज अगर किसी भी बेरोजगार से पूछिए कि उसे पहले रोजगार चाहिए या श्रम संरक्षण, तो उसका संभावित जवाब होगा कि पहले नौकरी चाहिए. अब जब देश में रोजगार सृजन बहुत कम हो रहा है, बेरोजगारी ज्यादा है, तब श्रमिक संरक्षण के लिए बनाये जा रहे नये कानूनों का क्या महत्व रह जाता है? अगर रोजगार नहीं रहेगा, तो हम संरक्षण किसको देंगे?
तो समय की मांग यही है कि पहले सरकार को रोजगार के नये अवसर सृजित करने चाहिए, फिर कल्याणकारी मसलों को सुलझाना चाहिए. पहले श्रमिक का संरक्षण, फिर रोजगार की तलाश और फिर कल्याणकारी कदमों वाले समीकरण को बदलने की जरूरत है. साथ ही रोजगार सृजन के लिए हमें चीन, वियतनाम, कंबोडिया और अन्य एशियाई देशों से सीख लेने की जरूरत है.
अमर कुमार, झरिया, झारखंड
