इस बार पलायन बने चुनावी मुद्दा

बिहार से झारखंड को अलग हुए करीब 19 साल बीत चुके हैं. आज भी झारखंड विकास की बाट जोह रहा है. सरकार की उदासीनता की वजह से पलामू का जपला सीमेंट प्लांट नीलाम हो गया. पुराने कल-कारखाने बंद हो रहे हैं और दूसरी तरफ नये उद्योग लगाने के नाम सरकार करोड़ों खर्च कर रही है. […]

बिहार से झारखंड को अलग हुए करीब 19 साल बीत चुके हैं. आज भी झारखंड विकास की बाट जोह रहा है. सरकार की उदासीनता की वजह से पलामू का जपला सीमेंट प्लांट नीलाम हो गया. पुराने कल-कारखाने बंद हो रहे हैं और दूसरी तरफ नये उद्योग लगाने के नाम सरकार करोड़ों खर्च कर रही है.

दुर्भाग्यवश खनिज पदार्थ बहुल राज्य के लोगों को दूसरे शहरों में रोजी-रोजगार के लिए पलायन करना पड़ता है. घर से बहुत दूर जाकर भी बड़ी मशक्कत से छोटा-मोटा काम ही मिलता है. साथ ही उनके साथ कई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं भी घटती हैं. फिर भी सरकार गंभीर नहीं है. अब विधानसभा चुनाव नजदीक है और पलायन झारखंड की बड़ी समस्या है. इसलिए इसे चुनावी मुद्दा बनाया जाना चाहिए.

मिथिलेश कुमार पांडेय, हजारीबाग

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