आरबीआइ की वित्तीय सहायता से केंद्र के हाथ मजबूत होंगे

फिलहाल अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही है और मंदी का अंदेशा उभर आया है, इसलिए रिजर्व बैंक की ओर से वित्तीय रूप से सरकार के हाथ मजबूत करने की पहल को उपयुक्त समय पर उठाया गया कदम ही कहा जायेगा. यदि अर्थव्यवस्था की सुस्ती और गहराने के बाद रिजर्व बैंक की ओर से […]

फिलहाल अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही है और मंदी का अंदेशा उभर आया है, इसलिए रिजर्व बैंक की ओर से वित्तीय रूप से सरकार के हाथ मजबूत करने की पहल को उपयुक्त समय पर उठाया गया कदम ही कहा जायेगा.
यदि अर्थव्यवस्था की सुस्ती और गहराने के बाद रिजर्व बैंक की ओर से सरकार को 1,76,051 करोड़ रुपये हस्तांतरित करने का फैसला किया जाता, तो शायद अनुकूल नतीजे हासिल करने में मुश्किल होती. रिजर्व बैंक के इस फैसले के बाद देश के कारोबार जगत के साथ वैश्विक निवेशकों के बीच अच्छा संदेश जायेगा.
रिजर्व बैंक से उम्मीद से अधिक राशि मिलने से केंद्र सरकार को केवल खर्च बढ़ाने में ही मदद नहीं मिलेगी, बल्कि चालू वित्त वर्ष के शेष समय में बुनियादी ढांचे से लेकर सामाजिक क्षेत्र तक में खर्च बढ़ाकर मांग को बल देने में भी सहायता मिलेगी.
डाॅ हेमन्त कुमार, गोराडीह (भागलपुर)

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