नया नौ दिन, पुराना सौ दिन !

ओल्ड इज गोल्ड के समान हिंदी में कहावत है नया नौ दिन और पुराना सौ दिन. लोकसभा चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी के कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे पर निरंतर अड़े रहने से काफी गहमा गहमी रही जिससे अंत में सोनिया गांधी को ही फिर से इसकी बागडोर संभालनी पड़ी है. पार्टी के […]

ओल्ड इज गोल्ड के समान हिंदी में कहावत है नया नौ दिन और पुराना सौ दिन. लोकसभा चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी के कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे पर निरंतर अड़े रहने से काफी गहमा गहमी रही जिससे अंत में सोनिया गांधी को ही फिर से इसकी बागडोर संभालनी पड़ी है.

पार्टी के अधिकांश नेता और जनता भी सोनिया जी को ही अभी उचित मानते हैं. कांंग्रेस पार्टी को अब बिलकुल नये सिरे से और नये मुद्दों के साथ ही आगे बढ़ना होगा. आज देश के सामने बढ़ती जनसंख्या, बेरोजगार, जुर्म, जाम-हादसे और निजीकरण की नीति आदि ही मुख्यतः बड़ी समस्याएं हैं, जिनके उचित और जल्द हल के बिना राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता.
इसलिए इन्हें लेकर ही आगे बढ़ना होगा. राष्ट्रवाद की नीति अपनी जगह बिलकुल सही है जिसके विरोध से पार्टी नीचा ही दिखेगी और कभी आगे बढ़ नहीं पायेगी. इस मुद्दे पर पार्टी अब भी अपना रुख सही कर सकती है.
वेद मामूरपुर, नरेला

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar digital desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >