लड़कियों के प्रति सोच बदलने की जरूरत

हमारे समाज में लड़कियों को माता-पिता के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है. समाज उनके साथ हमेशा दोयम दर्जे का व्यवहार किया है, जिसे नकारा नहीं जा सकता? इन्हीं समस्याओं और जटिलताओं को तोड़कर निकलने वाली एक युवा लड़की हिमा दास जो भारतीय धावक है, वह मात्र 19 साल की उम्र में 15 दिनों के […]

हमारे समाज में लड़कियों को माता-पिता के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है. समाज उनके साथ हमेशा दोयम दर्जे का व्यवहार किया है, जिसे नकारा नहीं जा सकता?
इन्हीं समस्याओं और जटिलताओं को तोड़कर निकलने वाली एक युवा लड़की हिमा दास जो भारतीय धावक है, वह मात्र 19 साल की उम्र में 15 दिनों के अंदर चौथा गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम नाम रोशन किया है. भारतीय धावक हिमा महिलाओं की 200 मीटर रेस में महज 23.25 सेकेंड में दौड़ पूरी कर मेडल अपने नाम किया है.
इतना ही नहीं वह आइएएएफ वर्ल्ड अंडर 20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी भी है. हमारे समाज में सोच में बदलाव की जरूरत है, ताकि कई हिमा हमारे समाज से निकलकर देश व दुनिया में अपना लोहा मनवा सके.
नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी

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