मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के नये मुख्यमंत्रियों द्वारा सत्ता संभालते ही किसानों की सरकारी ऋण व कर्जमाफी की पहल अच्छी है, किंतु यह सुकृत्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के विन्यास पर नहीं हो, क्योंकि इनमें ऐसे किसानों के ऋण भी माफ हो जायेंगे, जिन्होंने कभी फसल उगायी ही नहीं और फसल क्षति की राशि लेने पहुंच गये.
सरकार को चाहिए कि वे कर्जमाफी के लिए ऐसे किसानों के नाम को लिस्टेड करे, जिन्होंने सच में अपनी फसल गंवा दी हो या जिनकी फसल को क्षति पहुंची है. ऐसे भी उदाहरण मिले हैं कि कर्ज की प्राप्त राशि से किसान इतर खर्च कर रुपये को खत्म कर डालते हैं. ऐसे किसानों से आग्रह है कि कर्ज पाने की आदत न डालें और मिली राशि का सदुपयोग कर जीवन को खुशहाल बनाएं.
यशोदा पॉल, नवाबगंज, मनिहारी (कटिहार)
