पिछले दिनों जसीडीह स्टेशन में ट्रेन से उतरते वक्त किसी ने मेरा मोबाइल पॉकेट से निकाल लिया, वो तो नसीब अच्छा था जो थोड़ी-सी सूझ-बूझ और थोड़ा हो-हल्ला करने पर मोबाइल मिल गया. चोर बच निकला.
ये लोग ऐसे बच्चे होते हैं, जो धीरे-धीरे चोरी-पॉकेटमारी को अपना धंधा बना लेते हैं. हाल ही में प्रभात खबर में छपी खबर के मुताबिक तीन बच्चों को बाइक चुराते हुए पकड़ा गया, उनलोगों से मिली जानकारी के मुताबिक घर से पॉकेट मनी नहीं मिलने के कारण वे लोग मोबाइल, घड़ी आदि चुराने लगे थे.
इस उम्र के बच्चों को इतने पैसों की क्या जरूरत पड़ गयी, जो उन्हें चोरी करनी पड़ी. कुछ ऐसे बच्चे होते हैं, जो छोटी उम्र में ही गलत संगत में पड़ चुके होते हैं. संगत का असर कुछ यूं होता है कि नशा, जुआ या अन्य बुरी लत उन्हें लग जाती है. वे चोरी,पॉकेटमारी पर उतर जाते हैं. जरूरत है माता-पिता अपने बच्चों पर कड़ी नजर रखें, अन्यथा उन्हें बिगड़ते देर नहीं लगेगी और परेशानियां भी उठानी पड़ेंगी, सो अलग.
सुकुमार शेखर, देवघर
