आतंकियों का न कोई देश होता है और न ही मजहब

गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी की धरती पर जनमानस में जिस तरह का आक्रोश है, वह लाजिमी है.पुलवामा में आतंकियों ने जिस तरह से बर्बरता की, उसकी जितनी भी निंदा की जाये कम है. लेकिन, अब समय आ गया है कि इस आधुनिक युग में सेना को हाइटेक किया जाये, ताकि हर विषम परिस्थितियों में […]

गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी की धरती पर जनमानस में जिस तरह का आक्रोश है, वह लाजिमी है.पुलवामा में आतंकियों ने जिस तरह से बर्बरता की, उसकी जितनी भी निंदा की जाये कम है. लेकिन, अब समय आ गया है कि इस आधुनिक युग में सेना को हाइटेक किया जाये, ताकि हर विषम परिस्थितियों में हमारे सैन्यकर्मी डटे रहें. दूसरी बात जितने भी आतंकी हमले हुए हैं, उसमें कहीं न कहीं हमारी सुरक्षा व्यवस्था की लापरवाही रही है.
आतंकियों का न कोई देश नहीं होता है और न कोई मजहब. इसलिए आतंकी और उनके समर्थकों को किसी प्रकार की माफी नहीं मिलनी चाहिए, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि विश्व आतंकवाद से मुक्त हो सके.
आनंद पांडेय, रोसड़ा (समस्तीपुर)

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