यह कैसा आंदोलन

राजस्थान में गुर्जर आंदोलन एक बार फिर जारी है. गुर्जर नेता किरौड़ी सिंह बैंसला अपने समर्थकों के साथ सवाईमाधोपुर जिले में ट्रेन की पटरी पर बैठे हैं. उनकी मांग है कि गुर्जर समेत पांच जातियों को पांच फीसदी आरक्षण दिया जाए. वर्तमान में गुर्जर को अति पिछड़ा श्रेणी के तहत एक प्रतिशत आरक्षण अलग से […]

राजस्थान में गुर्जर आंदोलन एक बार फिर जारी है. गुर्जर नेता किरौड़ी सिंह बैंसला अपने समर्थकों के साथ सवाईमाधोपुर जिले में ट्रेन की पटरी पर बैठे हैं.
उनकी मांग है कि गुर्जर समेत पांच जातियों को पांच फीसदी आरक्षण दिया जाए. वर्तमान में गुर्जर को अति पिछड़ा श्रेणी के तहत एक प्रतिशत आरक्षण अलग से मिल रहा है. वैसे गुर्जरों की यह मांग काफी पुरानी है.
2007 और 2008 के आंदोलनों में 70 से भी ज्यादा लोग मारे गये थे. आंदोलन में रेल और सड़क रोकना सामान्य बात हो चुकी है. गुर्जरों का आंदोलन 2006 में शुरू हुआ था. तब से अब तक वसुंधरा सरकार में चार बार व गहलोत सरकार में अब दूसरी बार गुर्जर आंदोलन पर उतरे हैं. कई ट्रेनें कैंसिल हो चुकी हैं और कई के रूट बदले जा चुके हैं. सवाल है कि आरक्षण मांगने का यह कौन-सा तरीका है? हर बार गुर्जर आंदोलन के दौरान काफी हिंसा और आगजनी होती है.
इसके शिकार आम जन होते हैं, जिनका इन आंदोलनों से कोई लेना-देना नहीं है. पिछली बार भी मानवाधिकार आयोग ने भी इस पर सवाल उठाया था. आंदोलनों का स्थान रेल की पटरियां कैसे हो सकती हैं?
अमन सिंह, प्रेमनगर, बरेली, यूपी

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