देश को चाहिए एक और आजादी

सत्तर साल पहले मिली भारत की आजादी भ्रष्टाचार की गुलामी के आगे बौनी साबित हो रही है. जाहिर है, जब देश आजाद हुआ था, तब भ्रष्टाचार के विष-बेल की ऐसी तस्वीर की कल्पना किसी ने नहीं की होगी. स्वतंत्र भारत में कल्याण और विकास की पूरी अवधारणा और आकांक्षा को भ्रष्टाचार दीमक की तरह चाट […]

सत्तर साल पहले मिली भारत की आजादी भ्रष्टाचार की गुलामी के आगे बौनी साबित हो रही है. जाहिर है, जब देश आजाद हुआ था, तब भ्रष्टाचार के विष-बेल की ऐसी तस्वीर की कल्पना किसी ने नहीं की होगी.
स्वतंत्र भारत में कल्याण और विकास की पूरी अवधारणा और आकांक्षा को भ्रष्टाचार दीमक की तरह चाट गया और हालात यह है कि भारत सरकार हो या राज्य सरकार, विश्वविद्यालय हो या न्यायपालिका, स्वास्थ्य सेवा हो या नागरिक सुरक्षा, सीबीआइ हो या सेना, एक भी ऐसा क्षेत्र नहीं है, जिसकी जड़ों को इसने खोखला नहीं किया हो.
आलम यह है कि पूरी लोकतांत्रिक और संवैधानिक आज जर्जर है. सच कहें, तो हालात उस गुलामी से भी बदतर है, जिसे 1947 में हमने शिकस्त दी थी. देश को आजादी एक और लड़ाई की जरूरत है, भ्रष्टाचार की गुलामी से मुक्ति की लड़ाई.
शैलेश कुमार, मधुपुर.

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