मौजूदा दौर में राजनीति के प्रति लोगों की अनास्था बढ़ी है. राजनेताओं को जनता की भावनाओं को समझ कर उसी अनुरूप आचरण करना चाहिए. आदर्श राजनीति ही समाज को बदलती है और दिशा देती है. गांधी और नेहरू के दौर में देश में एक से एक चरित्रवान नेता अवतरित हुए थे. आज लोगों ने गांधी के विचारधारा को भुला दिया है.
नेताओं की लगातार बढ़ते हुए अपराध जगत में स्थिति को देखते हुए भारतीय राजनीति की स्थिति को अच्छा नहीं बताया जा सकता. आज नेताओं के लिए चरित्र-निर्माण, सहिष्णुता का माहौल बनाना ही प्राथमिकता होनी चाहिए. नेताओं के बदलने से ही देश का भाग्य और भविष्य बदल सकता है. देश के सभापति को भी राजनीति के मापदंड को स्थापित करने होंगे. संसद को बेहतर ढंग से चलाया जाये.
सांसदों को सवाल पूछने का मौका मिले. सही ढंग से कानून बने और सरकारी कामकाज का प्रभावी ढंग से निष्पादन हो सके. संसदीय कामकाज को बाधा पहुंचाने की राजनीति खत्म करनी होगी.
गुलाम गौस आसवी, धनबाद
