शासन पर हावी सांप्रदायिक हिंसा

हिंदुस्तान में सदियों से हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई आपस में प्रेम और समर्पण भाव से रहते आ रहे हैं और इसी भाईचारे को लेकर देश को अनेकता में एकता के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से देश में सांप्रदायिक ताकतें मजबूत हुई हैं. इसका सीधा श्रेय सरकार को जाता है, क्योंकि […]

हिंदुस्तान में सदियों से हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई आपस में प्रेम और समर्पण भाव से रहते आ रहे हैं और इसी भाईचारे को लेकर देश को अनेकता में एकता के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से देश में सांप्रदायिक ताकतें मजबूत हुई हैं.
इसका सीधा श्रेय सरकार को जाता है, क्योंकि जितनी हिंसा और सांप्रदायिकता इस सरकार के शासनकाल में हुई है, उतनी पहले नहीं हुई. अटल बिहारी वाजपेयी जी का शासनकाल इसका बेहतरीन उदाहरण है, जो भाजपा से थे, लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान ऐसी हिंसक घटनाएं नहीं हुई थीं.
घटना के बाद सरकार की चुप्पी देश के घातक है. अगर ऐसी ही सरकार चलती रही, तो हमारी संस्कृति और सभ्यता दोनों चौपट हो जायेगी और नयी पीढ़ी हमारी संस्कृति और भाईचारे का मतलब नहीं समझ पायेंगे.
असलम आजाद, गोड्डा

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