विश्वसनीयता बनाये रखे जेएसएससी

जेएसएससी और जेपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षा अक्सर विवादों में रहा है. जेएसएससी द्वारा फरवरी 2017 में आयोजित संयुक्त स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा भी विवादों में है. कमीशन द्वारा तीन विषयों- इतिहास, रसायन शास्त्र और भौतिकी के 539 सीट के लिए परीक्षा का आयोजन किया गया था, जिसमें परीक्षा के बाद से ही प्रश्न पत्र […]

जेएसएससी और जेपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षा अक्सर विवादों में रहा है. जेएसएससी द्वारा फरवरी 2017 में आयोजित संयुक्त स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा भी विवादों में है.
कमीशन द्वारा तीन विषयों- इतिहास, रसायन शास्त्र और भौतिकी के 539 सीट के लिए परीक्षा का आयोजन किया गया था, जिसमें परीक्षा के बाद से ही प्रश्न पत्र बेचे जाने का आरोप लगता रहा. आरोप तब और भी सही लगने लगे जब जेएसएससी ने परीक्षा का परिणाम जारी किया. एक जिला विशेष से ही टॉपर में अधिकतर उम्मीदवार थे, विशेषकर इतिहास के पेपर में.
कुछ उम्मीदवारों ने 98 फीसदी अंक प्राप्त किया, जो लगभग असंभव है. सवाल है कि जब जेएसएससी जैसी संस्था से छात्रों का विश्वास ही समाप्त हो जायेगा, तो यह संस्था, राज्य और सरकार तीनों के लिए ठीक नहीं होगा. आवश्यकता इस बात की है कि जेएसएससी हर हाल में अपनी विश्वसनीयता बनाये रखे, पारदर्शिता बनाये रखें. इस पर विचार करना चाहिए कि जो योग्य छात्र हैं, उनके साथ किसी भी तरह का अन्याय न हो.
मो नकीब अहमद, इमेल से

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