सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court) ने केंद्र सरकार की ‘सेंट्रल विस्टा परियोजना’ (Central Vista Project) में सभी निर्माण कार्य पर फिलहाल रोक लगा दी है. दूसरी ओर कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम (PM Modi’s program) को मंजूरी दे दी है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह आश्वासन दिया है कि जब तक प्रोजेक्ट का विरोध करने वाली लंबित याचिकाओं पर कोई फैसला नहीं आ जाता है, तबतक निर्माण कार्य या इमारतों को गिराने जैसा कोई काम नहीं किया जाएगा. केंद्र के आश्वासन के बाद ही कोर्ट ने आधारशिला रखने के कार्यक्रम को मंजूरी दी है.
क्या है सेंट्रल विस्टा परियोजना?
दरअसल नये संसद भवन का निर्माण सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत होना है. जिसका ठेका टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड को मिला था. इस परियोजना की घोषणा पिछले वर्ष सितम्बर में हुई थी, जिसमें एक नये त्रिकोणाकार संसद भवन का निर्माण किया जाना है. इसमें 900 से 1200 सांसदों के बैठने की क्षमता होगी. इसके निर्माण का लक्ष्य अगस्त 2022 तक है, जब देश स्वतंत्रता के 75वीं वर्षगांठ मनाएगा. साझा केन्द्रीय सचिवालय के बनने का अनुमान 2024 तक है.
10 दिसंबर को नये संसद भवन की आधारशिला रखेंगे प्रधानमंत्रर नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 दिसम्बर को नए संसद भवन की आधारशिला रखेंगे. इसकी जानकारी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 58 दिसंबर को दिया था.
971 करोड़ की लागत से तैयार होगा संसद का नया भवन
संसद की नयी भवन करीब 971 करोड़ की लागत से तैयार की जाएगी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अनुसार, संसद की नयी इमारत भूकंप रोधी क्षमता वाली होगी और इसके निर्माण में 2000 लोग सीधे तौर पर शामिल होंगे तथा 9000 लोगों की परोक्ष भागीदारी होगी.
क्यों किया जा रहा है विरोध
सेंट्रल विस्टा परियोजना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी है. जिसमें भूमि उपयोग बदलाव की मंजूरी सहित दी गई अन्य विभिन्न मंजूरियों के खिलाफ दायर की गई हैं. ये सभी अभी शीर्ष अदालत में विचाराधीन है.
