दिल्ली में मानसून की पहली बारिश, उमस और गर्मी से मिली राहत

Monsoon : अंतत: दिल्लीवासियों को गर्मी और उमस से राहत मिली है. बृहस्पतिवार को सुबह से ही हो रही ते बारिश ने जहां मौसम को खुशनुमा बनाया, वहीं कई निचले इलाकों में पानी का जमाव भी हुआ, जिससे लोगों को परेशानी हुई.

Monsoon : दक्षिण-पश्चिम मानसून बृहस्पतिवार को दिल्ली में पहुंच गया. मानसून की दस्तक से राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई. इस बार दिल्ली में मानसून ने लगभग 5 दिन देर से दस्तक दी है. आमतौर पर 27 जून तक दिल्ली में मानसून की एंट्री हो जाती है.

2021 के बाद पहली बार मानसून जुलाई में पहुंचा दिल्ली

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि 2021 के बाद यह पहली बार है जब मानसून ने जुलाई में दस्तक दी है. 2021 में मानसून 13 जुलाई को यहां पहुंचा था.पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो दक्षिण-पश्चिम मानसून 2025 में 29 जून, 2024 में 28 जून, 2023 में 25 जून और 2022 में 30 जून को दिल्ली पहुंचा था.

गरज के साथ बारिश का अनुमान

आईएमडी ने बृहस्पतिवार को दिल्ली के कई हिस्सों में गरज और चमक के साथ बारिश का अनुमान जताया है और कहा है कि इस दौरान आमतौर पर बादल छाए रहने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार, शनिवार और रविवार को भी गरज-चमक के साथ बारिश के आसार हैं. सुबह के समय राष्ट्रीय राजधानी के कई इलाकों में हवाओं के साथ रुक-रुक कर बारिश हुई और दिल्लीवासियों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली.

बारिश की वजह से गिरा पारा

दिल्ली में मानसून की दस्तक के साथ ही आम लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिल गई है. आईएमडी के अनुसार न्यूनतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 5.1 डिग्री कम है. वहीं अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है.

ये भी पढ़ें : राम मंदिर चंदा चोरी : VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा-चंपत राय लापरवाही के दोषी हो सकते हैं, हम जिम्मेदार नहीं

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >