Waqf Amendment Bill: क्या है वाटरलू का युद्ध? जिस पर संसद में अखिलेश ने मोदी सरकार को घेरा

Waqf Amendment Bill: लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया गया. इसपर सत्ता पक्ष के नेता ओर विपक्षी सांसदों के बीच जमकर बहस हुई. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी चर्चा में हिस्सा लिया. उन्होंने बिल को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा. अखिलेश यादव ने कहा, उनकी पार्टी बिल का विरोध करती है और वोटिंग होगी, तो विरोध में वोट करेगी. उन्होंने अपने भाषण के आखिर में कहा- बिल बीजेपी के लिए वाटरलू साबित होगा.

Akhilesh Yadav attacks Modi government

Waqf Amendment Bill: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर चर्चा करते हुए कहा- “बीजेपी के लिए वक्फ बिल वाटरलू साबित होगा. क्योंकि ऊपर से तो सभी सहयोगी दल हां-हां कर रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर बहुत सारे साथी सहमत नहीं हैं. ये बिल कोई उम्मीद लेकर नहीं आए हैं. ये सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. यह बिल जो लाया जा रहा है ये अपने वोट बैंक को संभालने के लिए और समाज को बाटने के लिए है. ये मुस्लिम में भी बंटवारा चाहते हैं. लेकिन मुस्लिम धर्म में कोई बंटवारा नहीं है. बीजेपी की कोशिश है कि इस बिल से मुस्लिमों में जो भाईचारा है, उसका बंटवारा कर दें.” अखिलेश ने कहा, “समाजवादी पार्टी इस बिल का विरोध करती है और वोट पड़ेगा तो हम इसके खिलाफ वोट डालने जा रहे हैं.”

क्या हुआ था वाटरलू के युद्ध में?

वाटरलू का युद्ध 18 जून 1815 में बेल्जियम में लड़ा गया था. जिसमें नेपोलियन बोनापार्ट को उसके मित्र राष्ट्र से ही विरोध का सामना करना पड़ा. नेपोलियन की फ्रांसीसी सेना को ड्यूक ऑफ वेलिंगटन और मार्शल ब्लूचर के नेतृत्व वाली मित्र राष्ट्र सेनाओं ने हराया था. उसी युद्ध के बाद से ही नेपोलियन के शासन का अंत हुआ था.

धर्म की चीजों से कारोबार नहीं हो सकता: अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने महाकुंभ में लोगों की मौत और कारोबार वाले बयान पर कहा- “धर्म की चीजों से कारोबार नहीं हो सकता. हमारे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा था कि कारोबार होगा. अखिलेश ने योगी को एक बार फिर से ‘तीस मार खान’ बताया और कहा- “उनसे पूछा गया कि कुंभ में कितने लोगों की जान गई, तो उन्होंने कहा, 30. उनसे पूछा गया कि कारोबार कितने का होगा…उन्होंने कहा, 30 गुना 10 हजार करोड़. सोचिए कुंभ कारोबार की जगह है. जमीन, वो चाहे रेलवे की हो या डिफेंस की हो, वो भारत की है. मैं पूछना चाहता हूं कि क्या डिफेंस की जमीन नहीं बेची जा रही है?”

बीजेपी पर निशाना

अखिलेश यादव ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा- “बाहर लिखते सत्यमेव जयते, भाजपाई अंदर असत्य बात कहते.” उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष को लेकर भी तंज कसा और कहा- ये अभी तक अपना अध्यक्ष नहीं चुन पाए हैं. इसपर अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा, “मेरे सामने जितनी भी पार्टियां हैं, उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष उन पांच लोगों को ही चुनना है, उनके परिवार से. हमें 12-13 करोड़ सदस्यों में से प्रक्रिया के बाद चुनना है. इसलिए इसमें समय लगता है. आपके मामले में तो ज्यादा समय नहीं लगेगा. मैं तो कह रहा हूं कि आप 25 साल तक अध्यक्ष बने रहेंगे. नहीं बदल सकता.”

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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