Vande Mataram controversy : उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरिश रावत ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात की. इस दौरान उनसे पूछा गया कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने वंदे मातरम् के लिए पहले दो छंद गाने का फैसला लिया है, इसपर उनका क्या मत है. हरिश रावत ने कहा कि भाजपा के लोग हर चीज का इस्तेमाल देश को बांटने के लिए करते हैं. वंदे मातरम् का इस्तेमाल भी वे अपने राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस ने वंदे मातरम् को जो महत्व दिया था, उसे कभी नकारा नहीं जा सकता.
उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस कार्य समीति में सुभाष चंद्र बोश, आचार्य नरेंद्र देव, मौलाना आजाद, जवाहरलाल नेहरू और रविंद्रनाथ टैगोर जैसे दिग्गज नाम शामिल थे, उन्होंने महात्मा गांधी की आज्ञा से उपसमीति बनाई और जो फैसला लिया उसे आज कोई कैसे बदलने का साहस कर सकता है. उन्होंने भाजपा और आरएसएस की देश की आजादी में योगदान न होने की ओर भी इशारा किया.
पूर्व उत्तराखंड सीएम ने कहा कि 1937 के कांग्रेस के फैसले को पलटने का काम आज की कांग्रेस नहीं कर सकती. ऐसा मोदी कर सकते हैं, अमित शाह कर सकते हैं. क्योंकि उनका देश की आजादी से कोई तारतम्य नहीं रहा है. लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं कर सकती, क्योंकि हमारा तारतम्य रहा है.
क्या है वंदे मातरम का कांग्रेस से जुड़ा विवाद?
15 अगस्त को झंडोतोलन के दौरान शुरू हुआ विवाद गहराता जा रहा है. कांग्रेस अपने कार्यालय में झंडा फहरा रही थी. वंदे मातरम् गाया जा रहा था. हालांकि पूरा गाया गया, लेकिन शीर्ष नेताओं में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, खरगे व अन्य ने सिर्फ शुरुआत के दो छंद ही गाए. इसके बाद गोवा में कांग्रेस का कार्यक्रम हुआ, वहां भी दो ही छंद गाए गए. बीजेपी ने इसपर सवाल खड़े किए और देशद्रोह का आरोप लगाया. जवाब में कांग्रेस ने तर्क दिया कि वे उसी वंदे मातरम् को गा रहे हैं, जो गांधी, नेहरू के समय गाया जाता था.
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