NALSAR विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कहा - BCI को लॉ स्टूडेंट्स पर एक्शन का अधिकार नहीं, जानें क्यों शुरू हुआ था विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने एक फैसले में स्पष्ट किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को यह अधिकार नहीं है कि वह लॉ स्टूडेंट्स के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करे.चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह साफ किया है कि BCI या स्टेट बार काउंसिल के पास यह अधिकार बिलकुल भी नहीं है.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने कहा कि जब तक कोई लॉ स्टूडेंट एडवोकेट के रूप में रजिस्टर्ड नहीं हो जाता, तब तक उसके आचरण पर डिसिप्लिनरी एक्शन लेने का अधिकार संबंधित विश्वविद्यालय या शिक्षण संस्थान का है. कोर्ट ने NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को लेकर BCI की ओर से 13 अगस्त को जारी किए गए कम्युनिकेशन यानी आधिकारिक पत्र या आदेश और उसके बाद जारी संशोधित कम्युनिकेशन को रद्द कर दिया. हालांकि इन आदेश को BCI पहले ही वापस ले चुका था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले में यह महत्वपूर्ण कानूनी सवाल साफ कर दिया कि भविष्य में BCI छात्रों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं कर सकता है.

BCI ने छात्रों के खिलाफ क्या की थी कार्रवाई ?

विवाद की शुरुआत NALSAR के कुछ छात्रों के उस विरोध से हुई थी, जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में चीफ गेस्ट के तौर पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत की मौजूदगी पर आपत्ति जताई थी. इसके बाद BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की ओर से 13 अगस्त को ऐसा निर्देश जारी किया गया था, जिसमें स्टेट बार काउंसिलों से NALSAR के 2026 बैच के ग्रेजुएट्स का अगले आदेश तक एनरोलमेंट नहीं करने को कहा गया था. साथ ही उन छात्रों की पहचान करने वाली रिपोर्ट भी मांगी गई थी, जिन्होंने चीफ जस्टिस के खिलाफ अभियान शुरू किया था. हालांकि विवाद बढ़ने के बाद BCI ने अपने निर्देश वापस ले लिए थे.

स्टूडेंट्‌स और वकीलों के बीच अंतर को कोर्ट ने किया स्पष्ट

NALSAR के कुछ छात्रों द्वारा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस सवाल का स्पष्ट जवाब दिया.कोर्ट ने कहा कि Advocates Act, 1961, जिसके तहत BCI का गठन हुआ है, उसमें ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो BCI या स्टेट बार काउंसिल को लॉ स्टूडेंट्स के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की शक्ति देता हो. कोर्ट के मुताबिक, छात्रों के मामले में अनुशासनात्मक अधिकार उस यूनिवर्सिटी या शैक्षणिक संस्थान के पास है जहां वे पढ़ रहे हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि BCI का लॉ एजुकेशन से कोई संबंध नहीं है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BCI कानून के तहत कानूनी शिक्षा के मानक निर्धारित और लागू कर सकता है, लेकिन इसके आधार पर वह किसी छात्र के खिलाफ व्यक्तिगत अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकता.

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By रजनीश आनंद

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रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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