सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो की रिव्यू पिटीशन खारिज की, 11 दोषियों की रिहाई को दी थी चुनौती

बिलकिस बानो 2002 दंगों के दौरान बलात्कार की शिकार हुई थीं और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी. बानो ने पुनरीक्षण याचिका के अलावा दोषियों की सजा माफ किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए एक अलग याचिका दायर की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो की पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है. बानो ने सामूहिक बलात्कार मामले के 11 दोषियों की रिहाई को चुनौती दी थी. उन्होंने अपनी याचिका में रिहाई के आदेश की समीक्षा करने का अनुरोध किया था.

गुजरात सरकार ने सभी 11 दोषियों की सजा माफ कर दी थी

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से 9 जुलाई 1992 की नीति के तहत दोषियों की समय से पूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका पर दो महीने के भीतर विचार करने को कहा था. गुजरात सरकार ने सभी 11 दोषियों की सजा माफ करते हुए उन्हें 15 अगस्त को रिहा कर दिया था.

2002 गुजरात दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई थीं बिलकिस बानो

बिलकिस बानो 2002 दंगों के दौरान बलात्कार की शिकार हुई थीं और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी. बानो ने पुनरीक्षण याचिका के अलावा दोषियों की सजा माफ किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए एक अलग याचिका दायर की थी.

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जो गलत है, उसके खिलाफ फिर लड़ूंगी : बिलकिस बानो

11 दोषियों की रिहाई के बाद बिलकिस बानो ने इससे पहले कहा था, जो गलत है और जो सही है, उसके लिए मैं फिर से लड़ूंगी. उन्होंने कहा, एक बार फिर खड़े होने और न्याय के दरवाजे पर दस्तक देने का फैसला मेरे लिए आसान नहीं था. मेरे पूरे परिवार और मेरा जीवन नष्ट करने वाले लोगों की रिहाई के बाद, मैं लंबे समय तक स्तब्ध थी. मैं अपने बच्चों, अपनी बेटियों, और सबसे बढ़कर उम्मीद खत्म होने से जड़ हो गई थी. बानो ने कहा कि उनकी चुप्पी दौरान उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों से समर्थन की आवाजें मिलीं, जिनसे उन्हें उम्मीद जगी है, और उन्हें एहसास कराया गया कि वह अपनी पीड़ा में अकेली नहीं हैं. उन्होंने कहा, इसलिए, मैं एक बार फिर खड़ी होकर लड़ूंगी, जो गलत है और जो सही है, उसके खिलाफ. मैं आज अपने लिए, अपने बच्चों के लिए और हर जगह की महिलाओं के लिए ऐसा कर रही हूं.

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By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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